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१००% हथकरघा ♦ पूर्ण अहिंसक ♦ श्रम पोषक ग्रामीण स्वरोजगार

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हमारे शो-रूम

श्रमदान भोपाल

श्रमदान,

हबीबगंज जैन मंदिर प्रांगणसरगम टॉकीज़ के सामने,

हबीबगंजभोपाल 462024

सम्पर्क - +919907795748


राष्ट्रहित चिंतक जैनाचार्य 108 श्री विद्यासागरजी महाराज के आर्शीवाद से 13 मई 2018 को प्रारंभ हुआ यह 600 वर्ग फुट का शोरूम। इस शो-रूम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

इस शो रूम का आंतरिक ढ़ांचा, प्राचीन काल में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक सामान जैसे जूट की रस्सी, बाँस कि डलिया, चीड़ की लकड़ी, आम की लकड़ी आदि से बना है। यह शो-रूम आधुनिकता के साथ साथ पारम्परिकता का अनोखा मेल दिखलाता है।

शोरूम में भारतीय ग्रामीण परिवेश का अनोखा चित्रण किया है जिसमें एक चलता हुआ हथकरघा भी है।

आशा है शीघ्र ही आप भी इस अनोखी कृति के साक्षी बनेंगे और यहां उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले, विविधताओं से भरे हस्त निर्मित वस्त्रों को प्राप्त कर सकेंगे।

श्रमदान से आपके द्वारा क्रय किया हर वस्त्र किसी ♦ जरुरतमंद के रोजगार में ♦ आपके स्वास्थ्य में ♦ भारतीय कलाओं को जीवंत रखने में ♦ अहिंसा धर्म पालन में  ♦ सहायक होता है।


श्रमदान खजुराहो

श्रमदान,

जैन मंदिर के सामनेईस्टर्न मंदिर समूह,

खजुराहो (म॰प्र॰) 471606

सम्पर्क - +919001430431

राष्ट्रहित चिंतक जैनाचार्य 108 श्री विद्यासागरजी महाराज के आर्शीवाद से दीवाली 2018 पर प्रारंभ हुआ यह 1500 वर्ग फुट का बांस से निर्मित शोरूम भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों के लिए आर्कषण का केंद्र बन गया है।

इस शो रूम का संपूर्ण आंतरिक ढ़ांचा, प्राचीन काल में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक सामान जैसे जूट की रस्सी, मटका, इलाहाबादी ईंटें, गोबर की लिपाई, बाँस कि डलिया, पत्थर कि चीप, चीड़ की लकड़ी, आम की लकड़ी आदि से बना है।

शोरूम में एक चलता हुआ हथकरघा भी है। और तो और शोरूम में लगी पेंटिंग/चित्रकारी भी हाथ से निर्मित हैं। आंतरिक छत पर लगे रंग-विरंगे हस्त निर्मित वस्त्रों से श्रमदान की आधुनिकता का पता चलता है। शो-रूम में स्थित दृश्य श्रव्य कक्ष (Audio-Visual Room) में आप आचार्य श्री जी की दूर-दृष्टि एवं श्रमदान के बारे में चलचित्रों के माध्यम से जान सकते हैं।

आशा है शीघ्र ही आप भी इस अनोखी कृति के साक्षी बनेंगे और यहां उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले, विविधताओं से भरे हस्त निर्मित वस्त्रों को प्राप्त कर सकेंगे।

श्रमदान से आपके द्वारा क्रय किया हर वस्त्र किसी ♦ जरुरतमंद के रोजगार में ♦ आपके स्वास्थ्य में ♦ भारतीय कलाओं को जीवंत रखने में ♦ अहिंसा धर्म पालन में  ♦ सहायक होता है।