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१००% हथकरघा ♦ पूर्ण अहिंसक ♦ श्रम पोषक ग्रामीण स्वरोजगार

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हमारे बारे में

 

श्रमदान एक सामाजिक ब्रांड है जो ग्रामीण रोजगार के लिए कार्यरत है। देश के विकास का लाभ ग्रामीण व दूर-दराज के क्षेत्रों तक समान रूप से न पहुंचने के कारण ये क्षेत्र अभी भी गरीबी की चपेट में है। सन् 2015 में मध्यप्रदेश के दो गांवो बीना बारह व कुंडलपुर से इस योजना की शुरुआत हुई। गुरुदेव जैनाचार्य १०८ श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा से दो दर्ज़न से अधिक शिक्षित युवा, जिनमें से कई बहुराष्ट्रीय संस्थाओं में नियुक्त थे; ने अपने उच्च पदों को त्याग कर वात्सल्य भावपूर्ण, अहिंसक वस्त्र निर्माण की हथकरघा योजना शुरू की। गुरुजी के पवित्र विचारों से प्रेरित होकर ये युवा ग्रामीण गरीबी, शहरी पलायन व श्रमशोषण जैसे गहरी समस्याओं को दूर करने का मजबूत इरादा रखते हैं। श्रमदान के इस समूह के इरादों के चलते, हस्तनिर्मित वस्त्र अहिंसक गुणों के साथ आधुनिक स्टाइल्स और ब्रान्डेड क़्वालिटी के लिये जाने जा रहे है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का मुख्य स्रोत्र कृषी ही है, जिसमें वुबाई, सिंचाई और कटाई के समय परिवार के सभी लोग कार्य करते है। ऐसे में उनको कुछ दिनों और कुछ माह के लिए गांव में रहना आवश्यक हो जाता है। मगर वाकी समय परिवार के ज्यादातर लोग एक दम खाली हो जाते है। श्रमदान हथकरघा योजना इन्हीं कृषकों के व्यर्थ होने वाले समय का सदुपयोग कर उनको आर्थिक मजबूती के साथ परिवार में रहकर सुख शांति प्रदान करता है। जिन गांवों में ये केंद्र खुल गए हैं, शहर पलायन कर चुके ग्रामीण युवा इस सुंदर जीवन शैली को अपनाने के लिए वापस लौट रहे हैं। ऐसे शहर से वापस लौटे युवा अपने आत्मविश्वास को वापस पाकर अपने परिवार और गांव के लिए सकारात्मक भूमिका निभा रहे है। 

श्रमदान के इस प्रयोग के पीछे उनके मजबूत चौदह प्रशिक्षण केंद्र हैं जो देश के कई राज्यों में स्थापित हैं और हर माह बढ़ते जा रहे हैं। इन केन्द्रों पर 3 माह का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही रहना और नाश्ता भी निःशुल्क मिलता है। इन केंद्रों पर प्रशिक्षण के दौरान भत्ता अथवा मानदेय भी मिलता है। 

श्रमदान का प्रशिक्षण प्राप्त कर ग्रामीण युवा हथकरघा के सभी आयामों के विषय मे सक्षम हो जाते हैं जैसे कि हथकरघा यंत्र, धागा योजना, ताना बनाना, भरन/जोड़नी करना, बुनाई शिल्प, हस्त कलाकारी, डॉबी, जकॉर्ड यंत्रों कि सेटिंग, बूटी एवं अन्य हस्त कलाकारी। यानी कि ये बन जाते है श्रमदान के समक्ष कलाकार जो विवध, अति आकर्षक वस्त्र बनाते हैं। श्रमदान के हस्त निर्मिति वस्त्र बहुत आरामदायक, वातनकूलित होने के साथ आनंद दायक भी होते है शायद इसलिए कि ये गुरु के वात्सल्य के प्रभाव से बनते हैं। 

श्रमदान, युवा क्षमताओं के पूर्ण विकास करने का उद्देश्य रखता है और इस उद्देश्य को दम देने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके छात्रों को रोजगार करने के लिए सहायता भी करते हैं। दो वर्षों में 25 से अधिक छात्र युवा ग्रामीण रोजगार कर अपने गांव की शान बन चुके हैं और 5 से 10 अन्य युवाओं को रोज़गार दे रहे हैं। 

 

श्रमदान से जुड़ें:

 

श्रमदान के इस पावन प्रयोग में जुटी युवा प्रबंधन की सकारात्मक ऊर्जा से प्रेरित होकर अब समाज के सक्षम वर्ग के अनेक लोग निश्वार्थ भाव से अपनी सेवा दे रहे हैं। ग्रामीण गरीबी और असमानता बहुत व्यापक समस्या है, श्रमदान इस दिशा में आपकी ऊर्जा से लाखों को उभार सकता है। अगर आप डिज़ाइनर, डिजिटल मीडिया ऐक्सपर्ट, टेक्सटाईल एक्सपर्ट, बिज़्नेस एडवाइजर या फिर कॉरपोरेट एग्जेक्यूटिव हैं, या फिर श्रमदान के लिए कुछ भी करना चाहते है तो इस ईमेल पर लिख सकते है।

info@shramdaan.in